बुधवार, 27 नवंबर 2019

रावण


"रावण" 
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धरा -गगन औ राहू केतू ,शनि जिसके रहा अधीन |
इन्द्र जाल व तंत्र -मंत्र ,सम्मोहन भी पराधीन ||
अस्त्र - शस्त्र वा विमान माया उसके अधीन|
फिर भी शाप से शापित ,वह जबकी रहा कुलीन ||

·         - सुखमंगल सिंह ,अवध निवासी   

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

"हिंदी की शाख बढ़ी "

"हिंदी की शाख बढ़ी "
हिंदी की शाख बढ़ी ,
दुनिया की आँख गड़ी |
गंगा की धाख बढ़ी ,
शिक्षक भी बेवाक चढे ||
नर- नारी खाप खड़े ,
मुल्लाओं के चाप चढ़े |
यूं.पी. के साथ चलें ,
धर्मराज क राज चले ||
स्वच्छता- हाथ बढे,
आमजन का काज चले |
हिंदी -परिपाटी बढे ,
हिंदी क  सहपाठी गढ़ें ||
चोरी राज पढ़ें ?
विकास के साथी बढ़ें |
हिंदी -शाबाश कहें ,
हिन्दुस्तानी राज गढ़ें ||
संस्कृति 'मंगल' बढे-
भी जनता साथी गढे |
हिंदी की शाख बढ़ी ,
दुनिया की आँख गड़ी||

रविवार, 10 दिसंबर 2017

"कुत्ता घर का "

पहले भोजन सदा घर में खाते वह अब रेस्टोरेंट में जाते /
घर की रखवाली करने को, लोग कुत्ते पालते |
द्वार पाल पहले होते अब, द्वार  कुत्ते भौकते /
कभी घर के बाहर कुत्ते रखे जाते ,अब घर डाग खेल रचाते |
मनुज बच्चा पैदा कर पाए या नहीं ,कुत्ता बच्चा  पैदा करते /
घर की रखवाली करने के लिये,लीग बढियां कुत्ता है लाते |
राजा दशरथ की वीवियाँ थीं तीन ,आज वीवी है एक कुत्ते हैं तीन /
कुत्तों को लोग इंजक्सन लगवाते ,वीवी को राम भरोसे छोड़ जाते |
सुग्रीव वीवी के वास्ते राम से हाथ मिलाके ,बालि से लड़ने जाते /
नौकरी के लिए वीवी बाहर जाती जाये ,सौहर रंगरेलियां मनाते ?
पहले भोजन सदा घर में खाते वह अब रेस्टोरेंट में जाते /
पहले घर में खाना वीवी बनाती और नाचने वाली बाहर से आती |
घर की वीवियाँ आज नाचती ,खाना बाहर से मंगाती ?
वीवियों पर आदमी की सोच ,कितनी बदल गई आज |
शादी से पहले कहते कब मिलने हमसे तुम आओगी /
शादी के बाद कहते हैं जान कब माइके तू जाओगी ||